Thursday, June 16, 2011

नेटग्रिड : आतंकवाद से सुरक्षा या निजता का उल्लंघन?

भारत सरकार तेज़ी-से ‘नेशनल इंटेलीजेंस ग्रिड’ तैयार करने में लगी हुई है, जिसे नेटग्रिड भी कहा जा रहा है। २०११-१२ के वित्त बजट में इस परियोजना के लिए सरकार ने ३९.७५ करोड़ का बजट तय किया है और कहा है कि ज़रूरत पड़ने पर और भी धन मुहैया कराया जाएगा। दरअसल यह गृहमंत्री पी चिदम्बरम के दिमाग़ की उपज है। चिदम्बरम का मानना है कि आतंकवाद से निपटने के लिए यह परियोजना बहुत कारगर साबित होगी। नेटग्रिड के तहत हर नागरिक की तमाम व्यक्तिगत जानकारी जैसे कि फ़ोन रिकॉर्ड, बैंक ख़ातों की जानकारी, प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज़, बीमा, इनकमटैक्स, इंटरनेट लॉग्स वग़ैरह की जानकारी एक चुटकी में हासिल की जा सकेगी। इस बारे में सरकार का कहना है कि इन सारी सूचनाओं को इकट्ठा करके रखने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि जब भी इन सूचनाओं की ज़रूरत होगी उन्हें विस्तृत डाटाबेस से खंगाल कर निकाला जा सकेगा। सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर आतंकवाद का सामना करने के लिए सिर्फ़ यूआईडी (यूनिक आइडेंटिफ़िकेशन) परियोजना काफ़ी नहीं है। इस परियोजना के ज़रिए सरकार किसी भी व्यक्ति और उसकी गतिविधियों को तत्काल ट्रैक कर सकती है। नेटग्रिड पर ‘नेशनल काउण्टर टेररिज़्म सेंटर’ (एनसीटीसी) की व्यापक परियोजना के तहत काम किया जा रहा है।

सरकार चाहती है कि प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ी २१ तरह की उपलब्ध जानकारियों आपस में जोड़ा जाए, जो अभी अलग-अलग सरकारी स्तरों पर छितरी हुई हैं। इसके माध्यम से इंटेलीजेंस एजेंसियाँ संदिग्ध व्यक्तियों पर नज़र रख सकेंगी और उनकी गतिविधियों की जाँच कर सकेंगी। दिलचस्प बात यह है कि नेशनल ग्रिड परियोजना के तहत यह सब महज़ एक क्लिक के ज़रिए संभव होगा। सरकार से जुड़ी ११ चुनिन्दा एजेंसियाँ इस ग्रिड को इस्तेमाल करने में सक्षम होंगी। सरकार का दावा है कि इन सूचनाओं का दुरुपयोग रोकने के लिए ख़ास व्यवस्था की जा रही है। दरअसल, हर नागरिक से जुड़ा डाटा संबंधित एजेंसी पर ही रहेगा और ज़रूरत पड़ने पर नेटग्रिड के माध्यम से उसे संसाधित करके व्यवस्थित तरीक़े से निकाला जा सकेगा।

रिसर्च एण्ड एनालिसिस विंग (रॉ), इंटेलिजेंस ब्यूरो, मिलिट्री इंटेलीजेंस, रिवेन्यू इंटेलीजेंस, नेशनल इंटेलीजेंस एजेंसी और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल आदि प्रमुख ११ संस्थाएँ नेटग्रिड का उपयोग करेंगी। हर एजेंसी अपने कुछ ख़ास लोगों के माध्यम से नेटग्रिड का उपयोग करेगी। ये विशेषज्ञ एजेंसी व नेटग्रिड के बीच कम्यूनिकेशन के लिए पुल का काम करेंगे और नेटग्रिड से प्राप्त डाटा के विश्लेषण में एजेंसी का मार्गदर्शन करेंगे।

कई विशेषज्ञों और सरकार का मानना है कि यह नई व्यवस्था सरकार के लिए प्रभावी तौर पर आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े ख़तरों से निपटने के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी। नेटग्रिड सरकारी एजेंसियों का काम कई मायने में आसान कर देगी और उनके बीच के तालमेल में भी काफ़ी सुधार आएगा। सारी सूचनाएँ आपस में जुड़ी होने की वजह से किसी के बारे में तुरन्त सारी जानकारी हासिल करना और उसपर कार्रवाई करना बेहद आसान हो जाएगा। इस ग्रिड के लिए एक केन्द्रिय ‘कमाण्ड सेंटर’ भी होगा, जो ग़ैर-आतंकी हॉटलाइन का काम भी करेगा और दूसरे देशों द्वारा मुहैया कराए गए अन्तर्राष्ट्रीय डाटाबेस से जुड़ा होगा, ताकि संदिग्धों पर पूरी तरह से नज़र रखी जा सके।

२००९ में नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड को विकसित करने का ज़िम्मा महेन्द्रा स्पेशल सर्विस ग्रुप के सीईओ कैप्टन रघु रमन को दिया गया और उन्हें देश में ख़ुफ़िया सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान व इंटेलीजेंस सूचना-तंत्र को मज़बूत करने के लिए नेटग्रिड के निर्माण का काम सौंपा गया। जहाँ सरकार ‘नेटग्रिड’ को आतंकवाद से सुरक्षा के लिए एक बड़ा क़दम बता रही है, वहीं इस परियोजना को लेकर कई तरह की शंकाएँ भी पैदा हो रही हैं। ‘नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड’ के सामने सबसे बड़ी चुनौती सूचनाओं की पर्याप्त सुरक्षा और उसके ग़लत इस्तेमाल को रोकना है। भारत में पर्याप्त सुरक्षा मानकों या ‘सेफ़गार्ड’ के अभाव में पहले भी इससे मिलती-जुलती कुछ योजनाएँ विफल हो चुकी हैं। सरकार का कहना है कि इस बाबत पुख़्ता क़दम उठाए जाएंगे, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई ठोस पहल नज़र नहीं आती है। सुरक्षा मानकों के बारे में चिदम्बरम ने आश्वासन दिया है और कहा है, “सूचना और जिन लोगों से जुड़ी ये सूचनाएँ हैं, उनके लिए बड़ी तादाद में सेफ़गार्ड की व्यवस्था की जाएगी। नेटग्रिड सूचनाओं को संगृहित नहीं करता, बल्कि उन्हें सिर्फ़ सूचीबद्ध करता है ताकि ज़रूरत के वक़्त उन्हें निकाला जा सके। डाटा चोरी से जुड़ी शंकाओं का कोई आधार नहीं है और न ही इसकी कोई ज़रूरत है।” हालाँकि इस तरह के आश्वासनों के बावजूद ‘आन्ध्र प्रॉजेक्ट’ जैसी इसी तरीक़े की परियोजनाएँ सेफ़गार्ड के अभाव में पहले भी औंधे मुँह गिर चुकी हैं। इसके अलावा विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार इंटेलिजेंस एजेंसियाँ क़ानूनी तरीक़े से काम नहीं करती हैं। ऐसे में उनके द्वारा नागरिकों की तमाम जानकारियों तक पहुँच ख़तरे का संकेत देती है। साथ ही भारत में निजता या प्राइवेसी से जुड़े क़ानूनों की भी सख़्त कमी है और डाटा से जुड़े क़ानून भी अभी बेहद लचर हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति से जुड़ी जानकारियों का ग़लत इस्तेमाल होता है, तो उसके लिए इसे रोक पाना काफ़ी मुश्किल साबित हो सकता है।

नेटग्रिड जैसी परियोजनाओं के साकार होने के साथ सबसे ज़रूरी चीज़ यह है कि साथ में प्राइवेसी और सूचना की सुरक्षा से जुड़े क़ानूनों को मज़बूत करने के लिए जल्द-से-जल्द पहल की जाए, ताकि आम नागरिक के पास सूचनाओं का ग़लत इस्तेमाल होने की दशा में बचाव के लिए क़ानून की ढाल हो। भारत में तेज़ी-से बढ़ता ‘ई-सर्विलिएंस’ भी विशेषज्ञों के मुताबिक़ ख़तरे की घण्टी है। सरकार पहले ही ‘इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलोजी एक्ट’ में बदलाव करके उपयोक्ता द्वारा इंटरनेट पर की जाने वाली गतिविधियों पर नज़र रखने का क़ानूनी तरीक़ा इजाद कर चुकी है। साथ ही सरकार द्वारा प्रस्तावित अन्य क़ानून भी इंटरनेट सेंसरशिप को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में कई लोग ‘नेटग्रिड’ को ऑनलाइन प्राइवेसी पर बड़ा आघात मानते हैं, जिसके अन्तर्गत लोगों के ऑनलाइन क्रियाकलापों पर सरकारी नज़र रहेगी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इस परियोजना के साथ न सिर्फ़ निजता से जुड़े क़ानूनों को सशक्त किया जाए बल्कि मज़बूत सेफ़गार्ड तैयार किए जाएँ, ताकि सूचनाओं का ग़लत इस्तेमाल रोका जा सके। साथ ही बीच का ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिसमें आतंकवाद से निबटने के नाम पर नागरिकों की गोपनीयता और निजता की ज़रूरतों को बलि न चढ़ाया जाए।

Wednesday, August 18, 2010

उन्नति और मोक्ष के कारक हैं शनिदेव

“शनि की साढ़ेसाती” – ज्योतिषी ने इतना भर कहा नहीं कि ज़्यादातर लोग सिहर जाते हैं। दरअसल शनि की महिमा ही कुछ ऐसी है कि उनका इंसान की कर्मकुंडली पर भारी होना इंसान को डरा देता है। शनि देव की यही छवि देवताओं में उन्हें ख़ास स्थान दिलाती है। शास्त्रों में शनि को सूर्य का पुत्र और मृत्यु के देवता यम का भाई बताया गया है। शनि की विशेषताओं का बखान करते हुए प्राचीन ग्रंथ “श्री शनि महात्म्य” में लिखा गया है कि शनि देव का रंग काला है और उनका रूप सुन्दर है, उनकी जाति तैली है और वे काल-भैरव की उपासना करते हैं।

इतिहास-पुराणों में शनि की महिमा बिखरी पड़ी है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि गणेशजी का जन्म होने पर सभी ग्रह उनका दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत पर पहुँचे। जैसे ही शनि ने आख़िर में भगवान गणेश के चेहरे पर नज़र डाली, उनका मस्तक कट कर धरती पर गिर गया। बाद में हाथी का सिर उनके धड़ पर लगाकर बालक गणेश को जीवित किया गया। शास्त्रों की यही बातें ज्योतिष में भी प्रतिबिम्बित होती हैं। ज्योतिष में शनि को ठण्डा ग्रह माना गया है, जो बीमारी, शोक और आलस्य का कारक है। लेकिन यदि शनि शुभ हो तो वह कर्म की दशा को लाभ की ओर मोड़ने वाला और ध्यान व मोक्ष प्रदान करने वाला है। साथ ही वह कैरियर को ऊँचाईयों पर ले जाता है। लोगों में शनि को लेकर कई तरह की भ्रांतियाँ हैं। बहुत-से लोगों का मानना है कि शनि देव का काम सिर्फ़ परेशानियाँ देना और लोगों के कामों में विघ्न पैदा करना ही है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार शनि देव परीक्षा लेने के लिए एक तरफ़ जहाँ बाधाएँ खड़ी करते हैं, वहीं दूसरी ओर प्रसन्न होने पर वे सबसे बड़े हितैशी भी साबित होते हैं।

ज्योतिष में साढ़ेसाती और ढैया आदि दोषों का कारण शनि को माना गया है। जब वर्तमान समय में शनि किसी की चंद्र राशि में, उससे एक राशि पहले या बाद में स्थित हो तो उसे साढ़ेसाती कहते हैं। कहते हैं कि साढ़ेसाती के दौरान भाग्य अस्त हो जाता है। लेकिन शनि को सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाला ग्रह माना जाता है। यदि शनि की नियमित आराधना की जाए और तिल, तैल व काली चीज़ों का दान किया जाए, तो शनि देव की अनुकम्पा पाने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगता।

शास्त्रों के मतानुसार हनुमानजी भक्तों को शनि के सभी कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं। रामायण के एक आख्यान के मुताबिक़ हनुमानजी ने शनि को रावण की क़ैद से छुड़ाया था और शनि देव ने उन्हें वचन दिया था कि जो भी हनुमानजी की उपासना करेगा, शनि देव सभी मुश्किलों से उसकी रक्षा करेंगे।

भारत में शनि देव के कई विख्यात मन्दिर हैं। ऐसे ही मंदिरों में से एक है मुम्बई के पास देवनार में स्थित “शनि देवालयम”। ऐसी मान्यता है कि जो भी यहाँ शनि देव को तैल चढ़ाता है उसे साढ़े साती से तुरंत छुटकारा मिल जाता है। शनि देव का सबसे प्राचीन मंदिर शनिशेंगणापुर में माना जाता है। कहते हैं कि कलियुग की शुरुआत में स्वयं शनिदेव यहाँ आकर रहने लगे थे। यहाँ जो भी भक्त श्रद्धा से शनि देव की उपासना करता है, वे उसे मनोवांछित फल देते हैं।


Click here to read this article in English - Shani Sade Sati Upay

Wednesday, May 19, 2010

ओजस कराएगी ब्लॉग लेखकों को आय

Joing AstroCAMP Associate Program today आगरा, 19 मई, हिन्दी ब्लॉगिंग में आर्थिक मॉडल की कमी की शिकायत करने वाले हज़ारों-लाखों लोगों को आगरा की कंपनी ओजस सॉफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड ने बड़ा तोहफा दिया है। कंपनी ने अपना ‘एफिलेट प्रोग्राम’ आरंभ किया है, जिसका इस्तेमाल कर ब्लॉगर आय अर्जित कर सकते हैं। इस आय की कोई सीमा नहीं है,लिहाजा इसे आर्थिक मॉडल बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा सकता है।

ओजस सॉफ्टेक के इस एफिलेट कार्यक्रम की शुरुआत आज आगरा में केंद्रीय हिन्दी संस्थान के रजिस्ट्रार श्री चंद्रकांत त्रिपाठी ने की। उन्होंने इस तरह के कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया को अपने पैरों पर खड़े होने में मदद मिलेगी। ओजस सॉफ्टेक के निदेशक प्रतीक पांडे ने इस खास कार्यक्रम की विशेषता बताते हुए कहा- “वेबसाइट्स-ब्लॉग्स को विज्ञापन मुहैया कराने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी गूगल हिन्दी को लेकर अभी भी बेरुखी अपनाए हुए है। गूगल के विज्ञापन अभी भी हिन्दी ब्लॉग और वेबसाइट को कई वजह से नहीं मिल रहे हैं। भारत में चंद कंपनियां ही एफिलेट प्रोग्राम्स चलाती हैं, जिनका इस्तेमाल न केवल तकनीकी तौर पर काफी झंझटभरा है,बल्कि उसमें आय की भी एक सीमा है। लेकिन, एस्ट्रोकैंप.कॉम के इस एफिलेट प्रोग्राम का इस्तेमाल बेहद सरल है, और इसका इस्तेमाल कर लोग कितनी भी कमाई कर सकते हैं।”

ब्लॉगर या साइट के संचालक आसानी से एस्ट्रोकैंप के एफिलेट कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए उन्हें सिर्फ एस्ट्रोकैंप की साइट पर जाकर एफिलेट प्रोग्राम का फॉर्म भरकर एक कोड हासिल करना होगा, जिसे वो अपने ब्लॉग अथवा वेबसाइट पर लगा सकते हैं। इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने के बाद कंपनी अपनी आय का एक हिस्सा ग्राहक के साथ बांटेगी। इस एफिलेट प्रोग्राम का भाषा से कोई लेना-देना नहीं है यानी हिन्दी-अंग्रेजी-गुजराती-मराठी आदि सभी भाषाओं की वेबसाइट-ब्लॉग इसमें शामिल हो सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि ओजस सॉफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड ने हाल में मोबाइल फोन के लिए ज्योतिष का निशुल्क सॉफ्टवेयर बनाकर खासी सुर्खियां बटोरी थी। प्रतीक पांडे ने कहा, कंपनी को आशा है कि एफिलेट प्रोग्राम भी खासा सफल रहेगा और ब्लॉग-वेबसाइट के जरिए अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर तलाश रहे लोगों के लिए उपयोगी साबित होगा। एस्ट्रोकैम्प एफिलेट प्रोग्राम के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए यहाँ जाएँ - http://www.astrocamp.com/affiliate

Wednesday, September 9, 2009

शनि की साढ़े साती

Shani Dev : Sadhe Sati (शनि देव : साढ़े साती)आज ९ सितम्बर के दिन रात के तक़रीबन १२ बजे शनि सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेगा। नव-ग्रहों में शनि सबसे धीमी गति से चलते वाला ग्रह है और इसलिए इसका राशि बदलना ज्योतिष के नज़रिए से काफ़ी अहमियत रखता है। राशि-परिवर्तन का असर व्यक्तियों और देशों, दोनों पर ही होगा। सिंह राशि का स्वामी सूर्य है, जो शनि के लिए मित्रतापूर्ण नहीं है और इसलिए कुछ ज्योतिषी मानते हैं कि पिछले दो सालों की हलचल और मंदी की वजह सिंह राशि में शनि की मौजूदगी है। अब शनि कन्या राशि में प्रविष्ट हो रहा है, जिसका स्वामित्व बुध के पास है और बुध को शनि का मित्र ग्रह माना जाता है। इसलिए ज्योतिषी मान रहे हैं कि आने वाला समय अच्छा होगा।

शनि की छवि आमतौर पर ऐसी है, जिससे सभी भय खाते हैं। शनि ही “साढ़े साती” का कारक भी है, जिसे लोग ख़राब मानते हैं और साढ़े साती से लोग काफ़ी घबराते भी हैं। शनि के कन्या में प्रवेश करने का एक मतलब यह भी है कि जिन लोगों की चन्द्र-राशि कर्क है, वे अब से शनि की साढ़े साती के प्रभाव में नहीं होंगे। वहीं दूसरी तरफ़, साढ़े साती उन लोगों के लिए शुरू हो रही है जिनकी चन्द्र-राशि राशि तुला है। इसलिए शनि के कन्या में होने के कारण, वे लोग साढ़े साती के प्रभाव के अन्तर्गत आएंगे जिनकी राशि सिंह, कन्या और तुला है।

अगर सच कहा जाए तो साढ़े साती से घबराने की क़तई ज़रूरत नहीं है और मैं पहले ही यह बात साढ़े साती पर लिखे गए अपने विस्तृत लेख में कह चुका हूँ। अगर आ प साढ़े साती के बारे में और ज़्यादा जानना-समझना चाहते हैं, तो कृपया वह लेख पढ़ें।

आख़िर में, सबसे ज़रूरी बात जिसके लिए मैंने यह लेख लिखा है – कल हम एस्ट्रोसेज.कॉम पर साढ़े साती रिपोर्ट की घोषणा करने वाले हैं। अतः पूरी ज़िन्दगी की विस्तृत साढ़े साती रिपोर्ट पाने के लिए एस्ट्रोसेज.कॉम देखें। मुझे उम्मीद है कि जल्दी ही यह रिपोर्ट हिन्दी में हिन्दीलोक.कॉम पर भी उपलब्ध होगी।

साढ़े साती रिपोर्ट पर ताज़ातरीन सूचना: अब “एस्ट्रोसेज.कॉम बर्थ चार्ट” और “माइकुण्डली.कॉम” पर रिपोर्ट पढ़ी जा सकती है। आप बायीं तरफ़ की सूची में “प्रडिक्शन” शीर्षक के अन्तर्गत “शनि साढ़े साती” नाम से यह रिपोर्ट पढ़ सकते हैं।

Wednesday, August 26, 2009

भग्न हृदय की आशा

प्रात पल्लवित हुआ पुष्प
सांझ में मुरझा गया
दिन को कर प्रकाशित सूर्य
निशार्वट में समा गया

भग्न हृदय की अश्रुधार
कपोल पर शुष्क हो गयी
थी जो रसासिक्त कल्पना
आज वो रुक्ष हो गयी

फिर भी इस दुःख-राशि में
आशी को ढूंढता हूँ
फिर शून्य से निर्माण को मैं
अस्तित्व को रूंधता हूँ

Monday, August 24, 2009

हिन्दीलोक.कॉम : नए ज़माने का हिन्दी पोर्टल

hindilok-hi हिन्दीलोक.कॉम - ये नाम शायद आपके ज़ेहन से अब कभी नहीं उतरे। हमारी कोशिश यही रहेगी कि अब यह नाम आपके दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाए। दरअसल हिन्दीलोक.कॉम अपने आप में अनूठा हिन्दी पोर्टल है। हमारी कोशिश है कि यहाँ हिन्दी  के हर तरह के पाठकों को कुछ-न-कुछ मिले, वह भी गुणवत्ता के साथ। यहाँ हिन्दी साहित्य के पाठक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका कथादेश को ऑनलाइन पढ़ सकेंगे। साहित्य-प्रेमी सिर्फ़ इसलिए कथादेश नहीं पढ़ पाते, क्योंकि वो उन्हें उपलब्ध नहीं हो पाती। लेकिन, हिन्दीलोक.कॉम पर “कथादेश” मुफ़्त उपलब्ध रहेगी। समाचार पाठक न केवल ताज़ातरीन ख़बरें पाएंगे, बल्कि पाएंगे वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा विश्लेाषण भी।

सिनेमा के पाठक सिर्फ़ मसालेदर ख़बरें ही नहीं, बल्कि पाएंगे संजीदगीभरी समीक्षाएँ- संगीत समीक्षा, कलाकारों के इंटरव्यू  और बॉलीवुड पर एक नया नज़रिया। कई जानीमानी हस्तियाँ भी अपनी राय रखेंगी – “मेहमान कोना” में। यही नहीं, बरसों जाँची-परखी एस्ट्रोसेज तकनीक से कुण्डली-मिलान और भविष्यफल जाना जा सकता है। साथ ही जो लोग हिन्दी पढ़ने में दिक़्क़त महसूस करते हैं, उनकी सुविधा का ध्यान रखते हुए पोर्टल पर एक सेक्शन अंग्रेज़ी का भी है।

ब्लॉग जगत की सुर्ख़ियाँ भी यहाँ देखी जा सकती हैं। ब्लॉगर मित्र न केवल पाठक बन पाएंगे, बल्कि वे अपने आलेख भी पोर्टल पर प्रकाशित करा सकते हैं। मित्रो, आपकी प्रतिक्रियाओं और लेखों का इंतज़ार रहेगा। देखिए - हिन्दीलोक.कॉम

Sunday, August 2, 2009

ज़िन्दगी ऊन का गोला

ज़िन्दगी…
ऊन के गोले की तरह
खुलती जाती है
आख़िर में रुकती है सिफ़र पर

यादें…
रात भर लहरों की तरह
बहती जाती हैं
थमती नहीं हैं सहर पर

जज़्बात…
पलछिन सागर की तरह
उफ़नते रहते हैं
ठिठकते हैं तो तेरी नज़र पर

वजूद…
मुश्किल पहेली की तरह
उलझता जाता है
हैरान हूँ बेबूझ दहर पर

© Copyright 2009 Pratik Pandey. All rights reserved.

Visionary WordPress Theme by Justin Tadlock Powered by Blogger, state-of-the-art semantic personal publishing platform