अपने बारे में लिखना हमेशा ही मुश्किल काम होता है। ख़ैर, फिर भी मैं कोशिश करता हूँ। पिछले जन्मों के कुछ पाप रहे होंगे, जिनके कारण बचपन में पढ़ने-लिखने का और फिर बाद में ब्लॉगिंग का शौक़ लगा। शुरुआती दौर में जब हिन्दी में पाँच-सात ब्लॉग हुआ करते थे, तब अपना अड्डा "मेरा हिन्दी चिट्ठा" नाम से जमाया, जो आज भी चल रहा है।
अख़बारों और पत्रिकाओं में कभी-कभार क़लम घसीटता रहता हूँ। शायद वो कम लगा तो यह ब्लॉग भी बनाने की इच्छा हुई। कुछ दिनों पहले रंगमंच की तरफ़ रुझान बढ़ा, इसलिए अभिनय का काम भी साथ में चल रहा है। फ़िलहाल अभी एमसीए कर रहा हूँ, आख़िरी सेमेस्टर है।




5 comments:
छा रहे हो भाई, MCA, अभिनय, कलम और ब्लॉग, सब एक साथ। क्या बात है।
भाई चला हीरो बनने :)
हमारी शुभकामनाऍं स्वीकार करें।
चले नहीं
आए हैं
हीरो
हैं
छायेंगे।
goodluck
मैं सोच भी नहीं सकता था कि जिस शख्स से मैं बात कर रहा हु, वो इतनी अच्छी कलम का धनी है, आज पूरे २ साल बाद किसी के लिए कमेन्ट लिखा है.....
पाण्डेय जी, आज का मेरा दिन सफल हो गया.
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