तारीख – 26 अप्रैल
वक़्त – रात के 11.30
जगह - केपटाउन
हे भगवान, शुक्र है कि अभी डायरी बची हुई है अपने दिल की बात लिखने के लिए। वरना, ब्लॉग पर तो सब कुछ सार्वजनिक है। लोग कमेंट्स भी ऐसे करते हैं क्या कहा जाए ?
आज मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है। हमारी टीम राजस्थान रॉयल्स हल्ला तो तब बोलती, जब खिलाड़ियों का बल्ला बोलता। पूरी की पूरी टीम 140 रन नहीं बना सकी। एक वक्त तो ऐसा लग रहा था कि पूरी टीम अपना ही रिकॉर्ड तोड़ देगी। रिकॉर्ड आईपीएल में सबसे कम रन बनाने वाली टीम का। सबसे पहले मैच में टीम 58 पर ढेर हो गयी थी। इस बार लगा था कि पहले ही चारों खाने चित हो जाएगी। वो तो भला हो, उस छोरे का..। रवीन्द्र जड़ेजा का, जिसने टीम की बची खुची नाक बचा ली।
लेकिन,बात हारने की नहीं है। बात है इस तरह हारने की। और अब तो मुझे लग रहा है कि मैंने टीम में पैसा लगाकर वास्तव में गलत किया। लोग मुझसे अब पूछ रहे हैं कि राजस्थान रॉयल्स में पैसा लगाना था,तो पिछले साल क्यों नहीं लगाया। इस बार ज्यादा रुपए खर्च करने पड़े और शेयर भी कम मिले। अब, उन्हें कौन बताए कि पिछले साल राज से मेरा अफेयर ऐसा थोड़े हुआ था कि मेरे कहने पर वो 75-80 करोड़ रुपए खर्च कर देता ! हाय-बेचारे राज के फंस गए करोड़ों रुपए । काश ! इतने रुपए फिल्म प्रोड्यूस करने में लगाए होते तो शमिता का भी भला हो जाता। दो-चार फिल्मों में शमिता काम कर लेती तो जीजा से भी खुश हो जाती। शायद उसका करियर भी बन जाता तो मम्मी भी खुश हो जाती। आखिर, अब मैं तो राज के साथ लंदन रहूंगी ! ...........
(शिल्पा शेट्टी की डायरी का बाक़ी हिस्सा पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए)




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