Tuesday, April 28, 2009

जूही चावला की डायरी (व्यंग्य)

तारीख़- 27 अप्रैल
वक़्त- रात के 11 बजे
जगह- पोर्ट एलिज़ाबेथ

मुझे डायरी लिखने का शौक़ नहीं है। लेकिन किस पर भड़ास निकालूँ? जय यहाँ आते तो शायद उन्हें चार-छः सुना देती । वो आए नहीं, और शाहरुख़ को सुनाना मुमकिन नहीं है। इसलिए इन काग़ज़ों पर ही अपना ग़ुस्सा निकाल रही हूँ।

हमारी टीम कोलकाता नाइट राइडर्स फिर हार गई। ख़ुदा जाने, क्या घटिया टीम बनी है इस बार! अब किसे दोष दूँ? शाहरुख़ को कितना समझाया था कि सौरव गांगुली को कप्तान बना रहने दो। वो फालतू है पूरी तरह। अब इंडिया की टीम में भी नहीं है। इसलिए पूरा ध्यान देगा टीम पर। लेकिन नहीं! शाहरुख़ को तो उस जादूगर बुकानन की बातें ही समझ आती हैं। उसने कहा मैकुलम को कप्तान बनाओ तो उसे बना दिया । क्या किया है उस मक्कू ने अभी तक? सिवाय टीम को हराने के!

अभी-अभी जय का भी फ़ोन आया था। बड़ा अपसेट था। कह रहा था कि फँस गए करोड़ों रुपए फालतू में। मुझपर नाराज़ हो रहा था कि तुम्हारी शाहरुख़ से दोस्ती के चलते मैंने दांव खेला था। पिछले साल का 13 करोड़ का प्रॉफ़िट इस बार इन नासपीटों ने ख़र्च करा दिया, और इस साल प्रॉफ़िट होता दिखता नहीं है ......

(पूरा व्यंग्य पढ़ने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें - जूही चावला की डायरी)

© Copyright 2009 Pratik Pandey. All rights reserved.

Visionary WordPress Theme by Justin Tadlock Powered by Blogger, state-of-the-art semantic personal publishing platform