हिन्दीलोक.कॉम - ये नाम शायद आपके ज़ेहन से अब कभी नहीं उतरे। हमारी कोशिश यही रहेगी कि अब यह नाम आपके दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाए। दरअसल हिन्दीलोक.कॉम अपने आप में अनूठा हिन्दी पोर्टल है। हमारी कोशिश है कि यहाँ हिन्दी के हर तरह के पाठकों को कुछ-न-कुछ मिले, वह भी गुणवत्ता के साथ। यहाँ हिन्दी साहित्य के पाठक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका कथादेश को ऑनलाइन पढ़ सकेंगे। साहित्य-प्रेमी सिर्फ़ इसलिए कथादेश नहीं पढ़ पाते, क्योंकि वो उन्हें उपलब्ध नहीं हो पाती। लेकिन, हिन्दीलोक.कॉम पर “कथादेश” मुफ़्त उपलब्ध रहेगी। समाचार पाठक न केवल ताज़ातरीन ख़बरें पाएंगे, बल्कि पाएंगे वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा विश्लेाषण भी।
सिनेमा के पाठक सिर्फ़ मसालेदर ख़बरें ही नहीं, बल्कि पाएंगे संजीदगीभरी समीक्षाएँ- संगीत समीक्षा, कलाकारों के इंटरव्यू और बॉलीवुड पर एक नया नज़रिया। कई जानीमानी हस्तियाँ भी अपनी राय रखेंगी – “मेहमान कोना” में। यही नहीं, बरसों जाँची-परखी एस्ट्रोसेज तकनीक से कुण्डली-मिलान और भविष्यफल जाना जा सकता है। साथ ही जो लोग हिन्दी पढ़ने में दिक़्क़त महसूस करते हैं, उनकी सुविधा का ध्यान रखते हुए पोर्टल पर एक सेक्शन अंग्रेज़ी का भी है।
ब्लॉग जगत की सुर्ख़ियाँ भी यहाँ देखी जा सकती हैं। ब्लॉगर मित्र न केवल पाठक बन पाएंगे, बल्कि वे अपने आलेख भी पोर्टल पर प्रकाशित करा सकते हैं। मित्रो, आपकी प्रतिक्रियाओं और लेखों का इंतज़ार रहेगा। देखिए - हिन्दीलोक.कॉम।




6 comments:
प्रिय प्रतीक जी
मंगलमय हो हिन्दी कार्य
बिना मय के हिन्दीमय हो
जगसारा तिन तारा तुन तारा।
दी गई लिंक पर क्लिक करने पर साईट ही नहीं खुलती
सॉरी बोला जाता है बार बार
512 की स्पीड वाला ब्रॉडबैण्ड है भई :-)
22 अगस्त 2009 को हिन्दी भवन में आयोजित साहित्य अमृत के व्यंग्य पुरस्कार समारोह में जाना हुआ तो सोच कर गया था कि कथादेश का अंक वहां से खरीद लूंगा परंतु वहां जाकर पता लगा कि वहां लगने वाला पत्र-पत्रिकाओं और पुस्तकों का काउंटर हटा लिया गया है। पर यहां आकर कथादेश मिल गई।
दरअसल प्रियवर शरद कोकास जी ने बतलाया है कि कथादेश में ब्लॉगिंग पर एक विशद लेख प्रकाशित हुआ है और उसे पढ़ने की मेरी जिज्ञासा है। अब मेरी जिज्ञासा का अवश्य शमन होगा।
आपके इन प्रयासों की जितनी प्रशंसा की जाए कम और, और करने का मन करता है।
लिंक खुल नहीं रहा है
निसंदेह एक बढिया प्रयास्!!! शुभकामनाऎं!!
लेकिन ऊपर दिया गया साईट लिंक तो खुल ही नहीं रहा। जरा चैक कर लें।
लिंक तो खुल रहा है भई । अत्युत्तम प्रयास । हिन्दी की बेहतरी के लिये ऐसे प्रयास स्तुत्य हैं । आभार ।
Post a Comment