Friday, August 28, 2009

ज़िन्दगी में जो इक कमी-सी है

ज़िन्दगी में जो इक कमी-सी है
आँखों में जो इक नमी-सी है
बहार में भी पतझड़ का जो इक एहसास-सा है
गुमशुदा है इक अरमाँ जो दिल के पास-सा है

हर सांस में जो इक प्यास-सी है
हर आह में जो इक आस-सी है
होश के भीतर छुपी जो इक बेहोशी-सी है
सरगोशियों में भी जो इक ख़ामोशी-सी है

दिन-रात जो इक गहमागहमी-सी है
जिस्म में कहीं रूह इक सहमी-सी है
दिलों के दरम्याँ इक बर्फ़ जो जमी-सी है
छाती के नीचे इक धड़कन जो थमी-सी है

क्या ये स्याह रातें ढलेंगी कभी
क्या ये बंद आँखें खुलेंगी कभी
क्या अंधेरे में कभी आएगा नूर
क्या ये बेचैनी कभी होगी दूर ?

Wednesday, August 26, 2009

भग्न हृदय की आशा

प्रात पल्लवित हुआ पुष्प
सांझ में मुरझा गया
दिन को कर प्रकाशित सूर्य
निशार्वट में समा गया

भग्न हृदय की अश्रुधार
कपोल पर शुष्क हो गयी
थी जो रसासिक्त कल्पना
आज वो रुक्ष हो गयी

फिर भी इस दुःख-राशि में
आशी को ढूंढता हूँ
फिर शून्य से निर्माण को मैं
अस्तित्व को रूंधता हूँ

Monday, August 24, 2009

हिन्दीलोक.कॉम : नए ज़माने का हिन्दी पोर्टल

hindilok-hi हिन्दीलोक.कॉम - ये नाम शायद आपके ज़ेहन से अब कभी नहीं उतरे। हमारी कोशिश यही रहेगी कि अब यह नाम आपके दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाए। दरअसल हिन्दीलोक.कॉम अपने आप में अनूठा हिन्दी पोर्टल है। हमारी कोशिश है कि यहाँ हिन्दी  के हर तरह के पाठकों को कुछ-न-कुछ मिले, वह भी गुणवत्ता के साथ। यहाँ हिन्दी साहित्य के पाठक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका कथादेश को ऑनलाइन पढ़ सकेंगे। साहित्य-प्रेमी सिर्फ़ इसलिए कथादेश नहीं पढ़ पाते, क्योंकि वो उन्हें उपलब्ध नहीं हो पाती। लेकिन, हिन्दीलोक.कॉम पर “कथादेश” मुफ़्त उपलब्ध रहेगी। समाचार पाठक न केवल ताज़ातरीन ख़बरें पाएंगे, बल्कि पाएंगे वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा विश्लेाषण भी।

सिनेमा के पाठक सिर्फ़ मसालेदर ख़बरें ही नहीं, बल्कि पाएंगे संजीदगीभरी समीक्षाएँ- संगीत समीक्षा, कलाकारों के इंटरव्यू  और बॉलीवुड पर एक नया नज़रिया। कई जानीमानी हस्तियाँ भी अपनी राय रखेंगी – “मेहमान कोना” में। यही नहीं, बरसों जाँची-परखी एस्ट्रोसेज तकनीक से कुण्डली-मिलान और भविष्यफल जाना जा सकता है। साथ ही जो लोग हिन्दी पढ़ने में दिक़्क़त महसूस करते हैं, उनकी सुविधा का ध्यान रखते हुए पोर्टल पर एक सेक्शन अंग्रेज़ी का भी है।

ब्लॉग जगत की सुर्ख़ियाँ भी यहाँ देखी जा सकती हैं। ब्लॉगर मित्र न केवल पाठक बन पाएंगे, बल्कि वे अपने आलेख भी पोर्टल पर प्रकाशित करा सकते हैं। मित्रो, आपकी प्रतिक्रियाओं और लेखों का इंतज़ार रहेगा। देखिए - हिन्दीलोक.कॉम

Sunday, August 2, 2009

ज़िन्दगी ऊन का गोला

ज़िन्दगी…
ऊन के गोले की तरह
खुलती जाती है
आख़िर में रुकती है सिफ़र पर

यादें…
रात भर लहरों की तरह
बहती जाती हैं
थमती नहीं हैं सहर पर

जज़्बात…
पलछिन सागर की तरह
उफ़नते रहते हैं
ठिठकते हैं तो तेरी नज़र पर

वजूद…
मुश्किल पहेली की तरह
उलझता जाता है
हैरान हूँ बेबूझ दहर पर

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